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तीर्थ की वंदना भक्ति भाव से करें ना कि दिखावे से तभी यह फलदाई है – आचार्य विनीत सागर महाराज

तीर्थ की वंदना भक्ति भाव से करें ना कि दिखावे से तभी यह फलदाई है – आचार्य विनीत सागर महाराज

रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां डीग 9783029649

कामां – कामवन के विजयमती त्यागी आश्रम में विराजमान दिगंबर जैन आचार्य विनीत सागर महाराज ने तीर्थ वंदना का फल विस्तार से बताते हुए कहा कि तीर्थ वंदना भाव सहित करने से ही फल की प्राप्ति होती है। तीर्थों की भाव सहित वंदना करने से मन शुद्ध होता है, पापों का नाश होता है, आत्मिक शांति और शक्ति मिलती है।
उन्होंने कहा कि तीर्थ वंदना से सद्गुणों की प्राप्ति के साथ साथ जीवन भी सफल बनता है। तीर्थो की वंदना करने से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।लेकिन यह फल केवल सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान से की गई वंदना से ही मिलता है, न कि केवल दिखावे या स्वार्थवश करने से, जिसके लिए पैदल यात्रा, शुद्ध आहार और संयमित आचरण ज़रूरी है, ताकि मन में बुरे विचार न आएं और आत्मा का उत्थान हो सके।
आचार्य ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे तीर्थ की वंदना पिकनिक के रूप में करते हैं जो की उचित नहीं है। तीर्थ पर पहुंचकर पहले भक्ति भाव से अर्ध आदि समर्पित करना चाहिए लेकिन वर्तमान में युवा सबसे पहले तीर्थ पर पहुंचकर फोटो खिंचवाने की होड़ में लग जाते हैं उससे वंदना के भाव स्वतः ही विकृत हो जाते हैं। जैन समाज के अध्यक्ष अनिल जैन के अनुसार अचार्य संघ शीतकालीन वाचना हेतु कामवन के विजय मती त्यागी आश्रम में विराजमान है जहां प्रतिदिन आहारचर्या व संध्याकालीन बेला में गुरु भक्ति के कार्यक्रम आयोजित किया जा रहे हैं।

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